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Age Of Marriage : पहली बार महिला-पुरुष की शादी की उम्र हुई बराबर, जानें क्या-क्या होंगे बदलाव

Age Of Marriage : 90 साल में पहली बार यह खबर आई है कि केंद्रीय कैबिनेट मंत्री (Union Cabinet Minister) ने लड़कियों की शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने की सिफारिश की है. वहीं बता दे कि इसके पहले भी साल 1978 में लड़कियों की शादी की उम्र 15 साल से बढ़ाकर 18 साल कर दी गई थी. वहीं ऐसा पहली बार होगा कि पुरूष और महिला की शादी की न्यूनतम उम्र एक समान होगी. ज्ञात हो कि यह फैसला सरकार ने साल 2020 में गठित टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर किया है.

शादी के लिए पुरुष और महिलाओं की उम्र हुई एक (Age of men and women for marriage is the same) :

ज्ञात हो कि शुरू से ही भारत में शादी की उम्र में पुरूष और महिला की उम्र का अंतर रहा है. पहली बार भारत में शादी के लिए न्यूनतम उम्र 1929 के शारदा एक्ट के जरिए लागू की गई थी. जो कि 1930 से पूरे देश में लागू हुआ था. वहीं आजादी के बाद साल 1949 में पुरूषों के लिए शादी की उम्र तो 18 साल ही रही थी लेकिन लड़कियों की न्यूनतम उम्र को 14 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दिया गया था. फिर इसके बाद साल 1978 में पुरूष और महिला दोनों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र बढ़ाकर 21 और 18 साल कर दी गई. अब इस साल ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महिला की उम्र को 18 से बढ़ाकर 21 साल करने पर मुहर लगा दी है.

क्यों पड़ी उम्र बढ़ाने की जरूरत :

वहीं बता दे कि सरकार ने 4 जून 2020 को देश में मातृत्व मत्युदर को कम करने और महिलाओं में पोषण स्तर को बनाए रखने से जुड़े मुद्दों को लेकर टास्क फोर्स का गठन किया था. वहीं इस मुद्दों का उद्देश्य यह है कि शादी की उम्र बढ़ाए जाने से कम उम्र में मां बनने की दर में गिरावट आ जाएगी. इसके साथ ही लड़कियों के विकास में भी काफी मदद मिलेगी. वहीं इसके साथ ही उनके शिक्षा स्तर में भी सुधार होगा.

इसके साथ ही आपको बता दे कि टास्क फोर्स का गठन समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली (Jaya Jaitley) के अध्यक्षता ने किया था. वहीं सू्त्रों के अनुसार टास्क फोर्स ने विभिन्न विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं और संबंधित पक्षों से बातचीत के आधार पर न्यूनतम उम्र की सीमा बढ़ाने की सिफारिश की थी.

किन-किन कानूनों में होगा बदलाव (Which laws will change) :

शादी की उम्र में बदलाव होने के बाद हिंदू मैरेज एक्ट और स्पेशल मैरेज एक्ट-1954 में भी बदलाव किए जायेगे, क्योंकि अभी हिंदू मैरेज एक्ट-1955 में लड़कियों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष है. वहीं इसके साथ ही स्पेशल मैरेज एक्ट में भी 18 साल का प्रावधान है. इसी तरह बाल विवाह निषेध कानून-2006 में भी 18 वर्ष का प्रावधान है. इसके साथ ही मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार लड़की के तरूण (15 साल ) अवस्था में पहुंचने पर शादी की अनुमति है.

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